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आप सभी लोग जो विदेश यात्रा के लिए प्रयास कर रहे हैं निश्चित तौर पर घूमने फिरने के लिए नहीं बल्कि अपने करियर के लिए विदेश में सेटलमेंट ढूंढ रहे हैं। हमारा लेख इसी बारे में है।

यदि ज्योतिष की बात की जाए तो ज्योतिष के अनुसार विदेश यात्रा के लिए कुंडली के नौवें घर और चौथे घर का आपस में संबंध देखा जाता है। फिर भी कुछ ऐसे ग्रह हैं जो विदेश यात्रा के लिए सहायक होते हैं इसलिए केवल कुंडली के अलग-अलग घरों की बात ना की जाए बल्कि गृह भी विदेश यात्रा के लिए जिम्मेदार उतने ही माने जाते हैं।

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विस्तार से जानते हैं कौन सा ग्रह विदेश भेजता है और कौन सा ग्रह विदेश जाने से रोकता है।

समें सबसे पहले हम बात करेंगे चंद्रमा की जो कि आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा बलवान है शुभ है तो जीवन में यात्राओं की कमी नहीं रहेगी। आप की विदेश यात्राएं बार-बार होंगी और एक जगह रहने की कल्पना भी मत कीजिए इसलिए विदेश में सेटलमेंट चाहते हैं तो चंद्रमा इसमें सहायक नहीं है क्योंकि सेटलमेंट के लिए एक ही जगह है रुकना पड़ता है लंबे समय तक।

मंगल एक ऐसा ग्रह है जो रिश्तो का प्रतिनिधित्व करता है और रक्त का अधिष्ठाता मंगल है इसलिए रक्त संबंधी भी इसी के अंतर्गत आते हैं तो जिसका मंगल बलवान होता है वह अपने भाई बहनों और नाते रिश्तेदारों के समीप रहता है फिर चाहे वह सब विदेश में रहे या स्वदेश में। विदेश यात्रा के लिए मंगल उतना सहायक ग्रह नहीं माना जाता।

अब बात करते हैं बुध की कुंडली में बुध कैसा भी हो परंतु व्यक्ति कितना चालाक है बुध से ही पता चलता है जाहिर सी बात है यदि आप सीधे साधे भोले भाले और जल्दी दूसरों की बातों में आ जाते हैं तो आपका बुध खराब है जिन लोगों का बुध खराब होता है उन्हें दूसरों से धोखा मिलता है इसीलिए कहा जाता है कि बुध विदेश में भटकता है और इंसान यहां-वहां भटक कर वापस अपने देश में आ जाता है। बुध यदि आपकी कुंडली में सहायक है तो आप विदेश में सेटल हो सकते हैं।

अब बात करते हैं वृहस्पति की। बृहस्पति ज्ञान और लगन जुनून यह सब देता है यदि बृहस्पति आपकी कुंडली में अच्छे अंशों में स्थित है तो आपको विदेश में सेटल होने लायक बुद्धि ज्ञान और परिस्थितियां अवश्य दे देगा। इसके अतिरिक्त वृहस्पति देता है अच्छे संस्कार। जिसका बृहस्पति अच्छा है वह ना केवल विदेश के लिए प्रयास कर सकते हैं बल्कि उन्हें विदेश जाने के लिए आवश्यक मदद भी मिल जाती है। इसलिए हम वृहस्पति को विदेश यात्रा के लिए सहायक कहेंगे।

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अब बात करते हैं शुक्र की। शुक्र ऐश्वर्या का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए जो लोग ऐशोआराम की जिंदगी चाहते हैं उनका शुक्र बहुत अच्छा होना चाहिए बाकी के लोग जिनका शुक्र अच्छा नहीं है वह कंफर्ट से नहीं रह सकते या नहीं उनको कठिन परिश्रम करना पड़ेगा विदेश जाने वाले अधिकतर लोग दिन-रात कड़ी मेहनत करके पैसा कमाते हैं इसलिए शुक्र का सहयोग आपको तभी मिलेगा यदि आपका शुक्र थोड़ा बहुत पाप ग्रहों से पीड़ित हो। यदि मेहनत करके आप पैसा कमाना चाहते हैं तो निश्चित तौर पर आपकी कुंडली में शुक्र का पीड़ित होना आवश्यक है अन्यथा विदेश यात्रा के लिए कोई और मकसद होना चाहिए। आप ऑनसाइट अपॉर्चुनिटी के लिए उपयुक्त हो सकते हैं।

शनि की बात की जाए तो शनि एक ऐसा ग्रह है जो आपको स्टेबिलिटी देता है जब शनि का समय आपके जीवन में होता है तब आप स्टेबल होते हैं। फिर चाहे आप स्वदेश में हो या विदेश में हो। शनि यदि कुंडली में अच्छा है और यदि आपकी वर्तमान महादशा या अंतर्दशा शनि की चल रही है तो शनि आपको विदेश में सेटल कर सकता है लंबे समय तक जो लोग विदेश में सेटल होकर काम करते हैं उनकी कुंडली की स्थिति इस प्रकार की ही होती है। यानी शनि विदेश यात्रा के लिए एक सहायक ग्रह है।

राहु कुंडली में अच्छा हो या बुरा जिस जगह राहु बैठता है वहां से व्यक्ति को दूर भेज देता है इसलिए यदि आपकी कुंडली में राहु दूसरे घर में है तो निश्चित तौर पर आप विदेश में अधिक सफल होंगे यानी अपने घर से दूर है। आप जितना अपने घर के समीप जाएंगे उतना ही परेशान रहेंगे। यदि आप कोशिश करें तो विदेश में सेटल होने के लिए आपके पास संसाधनों की कमी नहीं होगी। राहु विदेश में सेटल होने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त ग्रह है।

केतु राहु का अनुचर है इसलिए राहु की ही तरह केतु भी विदेश में सेटल होने के लिए मदद करता है। फर्क सिर्फ इतना है कि केतु की वजह से जो लोग विदेश में सेटल होते हैं उन्हें आखिरी दिन तक यह पता नहीं होता कि उन्हें विदेश जाना है अर्थात उनका विदेश गमन अचानक होता है।

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अब हमने यहां आठों ग्रहों की बात की है परंतु वहां ग्रह सूर्य उसका जिक्र हम सबसे अंत में कर रहे हैं क्योंकि यही कुंडली का एक मात्र ऐसा ग्रह है जो विदेश यात्रा या विदेश में सेटलमेंट होने के लिए बाधक ग्रह बनता है। यदि हम ऐसा कहें कि सूर्य सबसे अधिक विदेश यात्रा में रुकावट पैदा करता है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। सूर्य विदेश यात्रा में सहायक भी है परंतु यदि आपकी कुंडली में सूर्य की कृपा नहीं है तो आप विदेश नहीं जा सकते। यदि विदेश चले भी जाएं तो वहां से आपको खाली हाथ लौटना पड़ सकता है। हमने ऐसे लोगों की कुंडली का अध्ययन किया है जो विदेश में सेटल होने के बावजूद अपने घर से पैसे की मांग करते रहते थे और अंत में उन्हें अपने देश में वापस जाना पड़ा।

हर व्यक्ति विदेश में सेटल इसलिए होना चाहता है कि पैसा कमा सके और अपने परिवार को सभी सुख सुविधाएं दे सके। फिर चाहे वह स्वयं किसी भी तरह जीवन यापन करें। जो लोग पैसा कमाने के लिए विदेश में जाना चाहते हैं उनका सूर्य अच्छा नहीं बल्कि बहुत अच्छा होना चाहिए। नहीं तो विदेश में आप रह सकते हैं परंतु सुख प्राप्त नहीं कर सकते। हमने ऐसे लोगों की कुंडली का अध्ययन किया है जो लोग विदेश में उस समय गए जब उनके जीवन का आरंभ हुआ था जिनको शुरू से लेकर अब तक कोई समस्या नहीं हुई बल्कि जिनके काम बनते चले गए ऐसे लोगों की कुंडली का अध्ययन करके जब एक बात समान रूप से सभी की कुंडली में पता लगाई तो हमने भी यह निष्कर्ष निकाला कि सूर्य विदेश यात्रा के लिए सबसे अधिक जरूरी ग्रह है।

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हमें इतना समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद


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