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बीज मंत्रों को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती। इनका कोई अर्थ नहीं निकाला जा सकता। मंत्रों को जाप करके इनकी केवल प्रैक्टिस की जाती है। बार-बार इन मंत्रों को पढ़ने से यह मंत्र आपके भीतर एक ध्वनि का निर्माण करते हैं। यह ध्वनि आपके शरीर में गूंजती रहती है और बस आपको यही करना है।

कोई ग्रह कमजोर है तो उससे जुड़ा मंत्र आपके भीतर उस कमी को दूर करेगा जो कमी उस ग्रह के अशुभ होने के कारण आपके शरीर में है।

सूर्य के मंत्र का जाप करने के लिए अलग-अलग दो विधियां हैं। हम पहली विधि से शुरू करते हैं। आपको इस मंत्र को हेडफोन या हैंडफ्री के माध्यम से अपने कानों में सुनना है। केवल सुनने मात्र से आपके भीतर यह मंत्र अपने आप चलने लगेगा। हालांकि इसके लिए आपको काफी प्रैक्टिस की जरूरत होगी परंतु चलते फिरते उठते बैठते जागते सोते जब कभी आप फ्री हो आप इस मंत्र को सुन सकते हैं। जिस समय आपका दिल करें केवल उस समय इस मंत्र को चलाकर सुनने का प्रयास करें।

यदि आप गौर करेंगे तो इस मंत्र के वीडियो में आपको कुछ खास नहीं दिखाई देगा । मंत्र लिखा है एक बार बस। यही समझने की आवश्यकता है कि आपको मंत्र पढ़ते समय कुछ नहीं सोचना है आपने दिमाग को खाली कर देना है जिस तरह से इस मंत्र में स्क्रीन खाली है। एक ही चीज़ लिखी है वह मंत्र। मंत्र के एक-एक अक्षर पर ध्यान ले जाकर उसे सुनने का प्रयास करें। गौर करें तो केवल मंत्र को आप सुन पाएंगे ना ही हमारा कोई लोगों है और ना ही किसी और तरह की जानकारी। इस तरह के वीडियो में हम आपका ध्यान केवल एक बात तक सीमित रखना चाहते हैं वह है केवल मंत्र। जिस दिन आप यह बात समझ गए उस दिन के बाद इस मंत्र का असर आपको देखने को मिलेगा।

मंत्र की संख्या 108 ना होकर अधिक या कम हो सकती है। इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है आपको केवल 10 मिनट या 15 मिनट इस मंत्र को सुनना है। जितना आप रोज कर सकें नियम से। मंत्र का पूरा लाभ लेने के लिए एक निश्चित समय पर इस मंत्र को सुने और एक निश्चित अवधि तक इस मंत्र को बार-बार रिपीट करके सुनना है। रुकना केवल इतना ही है जितने समय में इसको रीप्ले किया जाता है। हम 10 मिनट का वीडियो भी दे सकते थे परंतु आप में से कुछ लोग केवल 2 मिनट ही सुनना चाहते हैं। इसलिए अपनी आवश्यकता के अनुसार इस मंत्र को प्रतिदिन एक बार 2 बार 4 बार 5 बार गया 10 बार रिपीट करके सुनने का प्रयास करें। यह हुई पहली विधि।

अब दूसरी विधि का विचार करते हैं । इस विधि को शुरू करने से पहले आपको यह पहली विधि से होकर गुजरना पड़ेगा क्योंकि पहली विधि से आप इस मंत्र को ठीक से याद कर पाएंगे कंठस्थ कर पाएंगे। यदि आपको यह मंत्र अच्छे से याद हो गया इसका उच्चारण आपने सीख लिया तो आप किसी आसन पर बैठ जाएं एक दीपक जला लें और 2 मिनट अपना ध्यान जलते हुए दीपक की लौ पर केंद्रित करें फिर मन ही मन सूर्य देव का ध्यान करें। अब आंखें बंद करके इस मंत्र का जाप शुरू करें।

किसी भी माला से जाप कर सकते हैं वैसे रुद्राक्ष की माला श्रेष्ठ रहती है। प्रतिदिन तीन माला जाप करना श्रेष्ठ रहता है। इससे भी अधिक श्रेष्ठ बात यह है कि आप इसे हर रोज एक ही समय पर करें। उदाहरण के तौर पर यदि आप सुबह 5:00 बजे इस मंत्र का जाप करते हैं तो प्रतिदिन ठीक 5:00 बजे आपको इसका जाप करना है।

40 दिनों के पश्चात सूर्य देव आपके जीवन में शुभ फल देना शुरू कर देंगे। इस मंत्र का इफेक्ट पहले ही दिन से शुरू हो जाता है परंतु नियमित रूप से जब आप इसे करते हैं तो 40 दिन के पश्चात आपके शरीर के आसपास एक सुरक्षा कवच का निर्माण होता है जिसे औरा कहते हैं यह और आपको सूर्य देव कि अशुभता से बचाएगा।

Categories: Mantras

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