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शुक्र के मंत्र को पढ़ने से क्या लाभ है शुक्र का मंत्र इसे पढ़ना चाहिए इसका सही उच्चारण क्या है शुक्र का सबसे अधिक प्रभावशाली मंत्र कौन सा है और शुक्र के मंत्र की पूरी विधि क्या है आज हम इस विषय पर बात करेंगे।

यदि आप स्क्रीन पर देखें तो एक बिल्कुल खाली स्क्रीन पर केवल एक मंत्र लिखा है और आवाज में आपको मंत्र की आवृत्ति बार-बार सुनाई देगी। यही वह मंत्र है जो शुक्र ग्रह कि शुभदा को आपकी कुंडली और आपके जीवन में बढ़ाता है। शुक्र का यही मंत्र बीज मंत्र कहलाता है और इसी मंत्र से आप शुक्र की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

मंत्र का प्रयोग कैसे करें

शुक्र का यह मंत्र आप बिल्कुल शांत चित्त होकर एकाग्रता के साथ सुने और कुछ दिन तक इसे केवल सुनते रहे। 10 मिनट या अधिक 20 मिनट इस मंत्र को सुनने मात्र से आप अपने जीवन में असाधारण परिवर्तन देख सकते हैं उनके नाम देखने में यह एक छोटा सा मंत्र है परंतु इसे प्रयोग करने पर आपको पता चलेगा कि छोटे-छोटे मंत्रों और अक्षरों में जादू छुपा होता है।

ईश्वर ने माया की रचना करके सभी प्राणियों को वशीभूत कर रखा है परंतु इंसान में ऐसी शक्ति है की ईश्वर की बनाई इस माया को एक व्यक्ति पहचान सकता है और इस माया के प्रभाव को कुछ समय के लिए बदल भी सकता है। परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर सकता है और अपने जीवन में आश्चर्यजनक बदलाव कर सकता है। ईश्वर ने इंसान को भी ऐसी शक्ति दी है क्योंकि इंसान मंत्र पढ़ सकता है। शुक्र का यह मंत्र आपको केवल सुनना है प्रतिदिन सुनने मात्र से आपको इस मंत्र से अनेक प्रकार के लाभ होंगे।

शुक्र मंत्र के फायदे

जिस प्रकार बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं उसी प्रकार शुक्र व्यक्तियों के गुरु हैं। हालांकि इसमें तामस की अधिकता है परंतु हमारे जीवन में शुक्र उन सब चीजों का प्रतिनिधित्व करता है जिनके लिए हम लालायित रहते हैं। जिस वस्तु या व्यक्ति में आकर्षण है सुंदरता है वह शुक्र की वजह से है। इसलिए शुक्र के मंत्र को पढ़ने से आकर्षण की वृद्धि होती है। शुक्र के मंत्र से आप धन ऐश्वर्य वैभव प्राप्त कर सकते हैं। जिन लोगों को जीवन में अभाव और गरीबी देखने को मिली है उन्हें यह मंत्र अवश्य ही पढ़ना चाहिए। इस मंत्र को प्रतिदिन यदि आप प्रयोग में लाते हैं तो सुख साधनों पर आपका अधिकार बढ़ना शुरू हो जाएगा। सुख संपत्ति समृद्धि और ऐश्वर्या के साधन आपकी ओर खींचे चले आएंगे। विडंबना इस बात की है कि इंसान सोचता है कि यह कैसे संभव हो सकता है परंतु इस मंत्र को प्रयोग में लाकर आप स्वयं इस मंत्र के चमत्कार देख सकते हैं।

जिन लोगों को स्त्री सुख प्राप्त नहीं हुआ है या जो लोग किसी स्त्री के मोह जाल में फंस गए हैं उन्हें यह मंत्र अवश्य पढ़ना चाहिए। जीवन की सार्थकता तो आप आसानी से समझ सकते हैं यदि आप इस मंत्र को पढ़ें। ना केवल सुख संपत्ति वैभव बल्कि आप इस मंत्र से यश भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त यदि आपकी कुंडली में शुक्र कमजोर है तो उसके फल स्वरुप आपको कुछ लक्षण देखने को मिलेंगे जैसे कितना भी सुंदर वस्त्र आप पहन लें परंतु आप पर जचे का नहीं। सही वस्त्र या वेशभूषा की आपको हमेशा तलाश रहेगी।

आपके अंदर आलस्य बहुत रहेगा। यदि मनोरंजन के समय पर आपके साथ हमेशा कुछ उल्टा हो जाता है तो आपका शुक्र कमजोर है यदि खुशी के मौके पर दुख उत्पन्न हो तो आपका शुक्र खराब है। यदि जीवन में अच्छे कार्य करने का आपको यश नहीं मिलता तो उसका कारण भी शुक्र ही है। यदि आपको लगता है कि आप प्रसिद्ध हो सकते थे परंतु आपको रिकॉग्निशन नहीं मिला तो इसके लिए भी शुक्र को ही जिम्मेदार माना जाएगा। शुक्र मूत्र विकार देता है सेक्स में अरुचि और प्रेम संबंधों में असफलता भी शुक्र ही देता है।

शुक्र अशुभ हो तो जवानी में व्यक्ति को आनंद नहीं मिलता और जवानी बीत जाने के पश्चात जगती पछता तरह जाता है। शुक्र कमजोर हो तो स्त्रियों से वैर विरोध बढ़ता है। शुक्र खराब हो तो बड़ी बहन से विरोध रहता है और यह विरोध पूरी उम्र जारी रहता है। इन लक्षणों को देखते हुए आप समझ सकते हैं कि आपको शुक्र के मंत्र का प्रयोग करना चाहिए या नहीं।

यदि आप चाहें तो शुक्र के मंत्र को आसन पर बैठकर विधि से भी शुरू कर सकते हैं। किसी भी शुक्रवार को सुबह के समय एक स्वच्छ आसन पर बैठकर अपने सामने दीपक जलाकर मन को एकाग्र करें। कुछ देर तक शांत रहकर दीपक की लौ के बीचो-बीच देखें और महसूस करें कि इस की गर्मी आपको अपने शरीर पर महसूस हो रही है।

थोड़ी देर के पश्चात आंखें बंद करके उस गर्मी और प्रकाश को महसूस करें। जब आप इसे महसूस कर पाए तो समझे कि आप एकाग्र हो चुके हैं अब मंत्र को शुरू करने का समय है। किसी किसी को एकाग्र होने में देर लगती है उसके लिए इतना ही करें कि 1 मिनट मौन रहकर माथे के बीचो-बीच ध्यान लगाएं और मंत्र का जाप शुरू करें इस मंत्र की तीन माला कम से कम करनी चाहिए और अधिक से अधिक पांच माला का विधान है इससे अधिक शुरुआत में ना करें।

40 दिनों के पश्चात छोटी कन्याओं को भोजन कराएं या उन्हें दान दक्षिणा दें। मंत्र को प्रतिदिन पढ़ना आवश्यक है जैसा कि हम हमेशा कहते हैं कि मंत्र को एक निश्चित समय पर पड़े। यदि आप मंत्र को इस विधि से शुरू करते हैं तो पहले सप्ताह से ही इस मंत्र का असर आपके जीवन में होना शुरू हो जाएगा। 40 दिनों के पश्चात शुक्र ग्रह आप पर कृपा करेंगे और प्रतिवर्ष आपको कम से कम 40 दिन शुक्र की उपासना इसी तरह से करनी चाहिए।

जिनका शुक्र नीच का है उन्हें इस मंत्र से विशेष लाभ है। जिनके स्त्री संतान अधिक हैं उनको भी शुक्र का मंत्र पढ़ना चाहिए इसके अतिरिक्त जो लोग शीघ्र शादी करना चाहते हैं उनके लिए भी यह मंत्र बहुत लाभदायक है। इस मंत्र से आपके जीवन में स्त्री सुख का जो अभाव है वह मिट जाएगा। हमारा सुझाव है कि शुरुआत में आपको इस मंत्र को केवल सुनना चाहिए और 20 दिन तक प्रतिदिन 10 मिनट के हिसाब से आप इस मंत्र को सुने और अपने जीवन में इसका प्रभाव देखें। हमारा विश्वास है कि जो भी शुक्र के मंत्र का जाप शुरू कर देता है वह इसे कभी छोड़ नहीं पाएगा।


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