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कुंडली के सातवें घर से पति पत्नी ससुराल व्यापार यह सब तो आप जानते हैं देखा जा सकता है परंतु क्या आप जानते हैं कुंडली का यह स्थान आपके दादा का है दादी का है इसके अतिरिक्त कुंडली के चौथे घर से आपकी नानी नाना के बारे में भी ज्ञात किया जा सकता है |

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कुंडली का सातवां घर विवाह और जीवन साथी के लिए जाना जाता है परंतु क्या आप जानते थे कि कुंडली के सातवें घर से ही ऐसे व्यक्ति का भी पता चलता है जो आपके जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण रोल निभाता है। एक पत्नी के सिवाय और कौन हो सकता है? परंतु ऐसा नहीं है कुछ लोगों का जीवन अपने बॉस के इर्द-गिर्द घूमता है और वह अपने बॉस की सेवा लंबे समय तक करते रहते हैं।

कुछ लोगों की पत्नी उनके लिए जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है परंतु जन्म कुंडली का सातवां घर वह है जिसके लिए जातक जीवन भर भटकता है। आपको अपने जीवन में अपने शरीर के अलावा जिस किसी से प्रेम है कुंडली का सातवां घर उसी के बारे में बताता है। कुछ लोगों के लिए सबसे प्यारा उनका जीवन साथी होता है तो कुछ लोगों के लिए उनके बच्चे सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

कुछ लोग अपने जीवनसाथी को नहीं बल्कि अपनी प्रेमिका को जीवन में सबसे अधिक महत्व देते हैं तो कुछ लोग अपने माता पिता को जीवन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं कुंडली का सातवां घर यही बताता है कि आप के पश्चात आपके जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण जो भी है उसकी स्थिति आपके जीवन में क्या रहेगी उसका क्या प्रभाव आपके जीवन पर पड़ेगा। ना केवल पत्नी या पति बल्कि आपके पति या पत्नी से जुड़ी हर चीज कुंडली के सातवें घर से देखी जाती है।

कहने को तो कुंडली का आठवां घर ससुराल के लिए प्रसिद्ध है परंतु दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कभी अपने ससुराल गए ही नहीं। हम ऐसे लोगों को भी जानते हैं जिन्होंने जीवन भर अपनी पत्नी से अपने पैतृक घर को छिपा कर रखा और स्वयं को अनाथ बताया। जी हां दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो अपनी पिछली जिंदगी को उजागर नहीं करना चाहते और उससे जुड़ी हर चीज को छुपा कर रखते हैं जैसे यदि बात की जाए ऐसे व्यक्ति की जो दो शादियां कर चुका है और उसकी पिछली शादी के विषय में उसकी पत्नी को अब तक नहीं पता चला है।

नियम से देखा जाए तो कुंडली का सातवां घर पत्नी का है परंतु यदि एक पत्नी या एक पति जीवन में आया और उसके पश्चात दोबारा शादी हुई तो कुंडली के दूसरे घर से देखा जाता है कि दूसरी पत्नी या दूसरी शादी किससे होगी। इस तरह क्या कुंडली के सातवें घर की विश्वसनीयता समाप्त हो जाएगी? ऐसा नहीं है बल्कि आप जीवन में सबसे अधिक चाहते हैं कुंडली के सातवें घर से उसी का पता लगाया जाता है।

एक सन्यासी को अपने जीवन में स्वयं से अधिक अपना ब्रह्मचर्य प्रिय रहता है इसलिए उसके ब्रह्मचर्य को हम कुंडली के सातवें घर से देखेंगे।

जो लोग पार्टनरशिप में काम करते हैं उनके लिए भी कुंडली का सातवां घर महत्वपूर्ण होता है फिर चाहे यह पार्टनरशिप आपकी किसी व्यक्ति के साथ हो या फिर आपकी शर्म ही पार्टनरशिप फर्म है जैसे कि वोडाफोन और आइडिया दोनों की पार्टनरशिप है परंतु कंपनियां अलग-अलग हैं।

इसी तरह एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत वे लोग जो यूएस में रहते हैं वह भी कुंडली के साथ में घर को अध्ययन करें तथा वे लोग जो अमेरिका कनाडा ऑस्ट्रेलिया कहीं भी रहते हैं उनको भी कुंडली के सातवें घर को देखना जरूरी है। एक फैक्ट्री चलाने वाले 5 लोग आपस में पाटनर हैं तो कुंडली का सातवां घर 10 मीटर से अधिक महत्वपूर्ण होगा। आपकी रिश्ते में नानी या ना ना कुंडली के सातवें घर से देखे जाएंगे इस तरह से कुंडली के सातवें घर को अध्ययन करने से ऐसी अनेक बातें हैं जो आपने कभी पहले पढ़ी या सुनी नहीं थी।

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आइए आप जानते हैं कुंडली के सातवें घर में विभिन्न ग्रहों की स्थिति का क्या फल होता है।

सबसे पहले सूर्य की बात करते हैं सूर्य कुंडली के सातवें घर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और सूर्य का फल यहां जातक को अपने पति या पत्नी से विरक्ति दे देता है जातक अपने जीवनसाथी के प्रति उदासीन बना रहता है और उसे विवाह में अधिक रूचि नहीं होती।

चंद्रमा कुंडली के सातवें घर को बल प्रदान करता है और जीवनसाथी के प्रति जातक अत्यधिक संवेदनशील रहता है।

कुंडली के सातवें घर में मंगल की स्थिति अच्छी नहीं मानी गई है यह मांगलिक योग बनाता है और जातक के पति या पत्नी की आयु के लिए घातक होता है। परंतु दूसरी ओर सातवें घर का मंगल जातक को व्यवसाय बिजनेस आदि में सफल बनाता है।

कुंडली के सातवें घर में बुध की स्थिति अति उत्तम है परंतु जातक का जीवन साथी अत्यधिक चालाक और षड्यंत्र कारी होता है। जिससे जातक जीवन में सबसे अधिक डरता है।

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कुंडली के सातवें घर में बृहस्पति का फल उत्तम है जातक अपने जीवन साथी के प्रति ईमानदार बना रहता है और विवाह के पश्चात जीवनसाथी के लिए ही जीता है और उसी के इर्द-गिर्द उसका जीवन घूमता है। एक तरह से जातक पिछले जन्म का जीवनसाथी के प्रति ऋण इस जन्म में उतारता है।

शुक्र कुंडली के सातवें घर में जातक को पत्नी की ओर से या पति की ओर से पूर्ण सुख देता है। जातक की शक्ति अपने जीवनसाथी के कारण अत्यधिक बढ़ जाती है। जातक को जीवन में पति या पत्नी हर तरह की मुसीबत से बचाने में मदद करते हैं। जातक को पत्नी का पूर्ण सुख मिलता है। विवाह के पश्चात जातक का भाग्य उदय होता है।

शनि कुंडली के सातवें घर में यूं तो बहुत अधिक प्रसन्न रहता है परंतु जातक को जीवन में प्रेम का अभाव रहता है या फिर जातक का जीवनसाथी प्रेम आकर्षण और परस्पर संवेदना के प्रति उदासीन रहता है। व्यापार कारोबार आदि में आशातीत सफलता मिलने के बावजूद जातक अपने जीवन को जीवन साथी की ओर से अपूर्ण मानता है। ना तो जातक अपने जीवन साथी से कभी संतुष्ट होता है और ना ही इसके प्रति किसी प्रकार का कोई व्यवहार करता है। अर्थात जातक को दांपत्य सुख की कमी होती है।

राहु कुंडली के सातवें घर में जातक को अपने जीवन साथी का पालतू बना देता है क्योंकि राहु हमेशा अधिकार के लिए लड़ता है और उसके अधिकार क्षेत्र में सूर्य और चंद्रमा जैसे ग्रह बड़ी ही आसानी से फंस जाते हैं। राहु एक अमर ग्रह है इसलिए उसका कोई तोड़ नहीं। इसीलिए जातक अपने जीवन में अपने जीवन साथी से ना तो मुक्त हो सकता है और ना ही उसके प्रति वफादार रह सकता है।

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कुंडली के सातवें घर में केतु का होना इस बात का संकेत है कि जातक को अपने जीवन साथी से अलग होना पड़ेगा परंतु फिर भी उसका तलाक नहीं हो पाएगा। या तलाक होना मुश्किल ही नहीं असंभव हो जाएगा। स्त्री से वियोग या पति से वियोग कुंडली के सातवें घर में केतु के कारण होता है। केतु के कुंडली के सातवें घर में होने से जातक के जीवनसाथी के कई ऐसे राज होते हैं जो जातक को कभी पता नहीं चलते।

तो यह था कुंडली के सातवें घर में विभिन्न ग्रहों का फल आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी हमें कमेंट करके अवश्य बताएं।

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