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आइए बात करते हैं पांचवें घर के बारे में प्रेमी प्रेमिका, मनोरंजन, पढ़ाई, बेटा बेटी, संतान लॉटरी यह सब तो आपको पता था। परंतु क्या आप जानते हैं कि कुंडली के पांचवें घर से यह पता चलता है कि आपके शौक क्या है । किन चीजों में आप को सबसे ज्यादा दिलचस्पी है । इसके अतिरिक्त यह भी जाना जा सकता है । कि कौन सी चीजें आप को इंप्रेस करने के लिए जरूरी हैं जी हां बिल्कुल हिडन है यह स्थान।

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कुंडली के पांचवें घर से संतान और शिक्षा का प्रमुख रूप से विचार किया जाता है । इसके अतिरिक्त प्रेम संबंधों के विषय में भी कुंडली के पांचवें घर से अध्ययन करते हैं यह सब जानते हैं परंतु इस आर्टिकल में हम आपको वह सब बताने जा रहे हैं जो अभी तक आपने सुना नहीं होगा कहीं पढ़ा नहीं होगा।


शिक्षा की बात करें तो कुंडली के पांचवें घर से बीए तक की शिक्षा का विचार करना चहिए । यदि कुंडली के पांचवें घर में कुछ पाप ग्रहों का प्रभाव है तो जातक अंडर ग्रेजुएट रहता है । यानी शिक्षा पूर्ण नहीं हो पाती। प्रेम संबंधों का विचार करें तो केवल विवाह से पूर्व के प्रेम संबंधों का विचार कुंडली के पांचवें घर से किया जाना चाहिए।


वह पैसा जिसके विषय में सिर्फ आपको पता है या फिर किसी विश्वासपत्र के पास रखा हुआ । आपका धन संपत्ति यह सब कुंडली के पांचवें घर से देखा जाता है। गर्भावस्था के पांचवे महीने के पश्चात बच्चे के जन्म तक की स्थिति कुंडली के पांचवें घर की जिम्मेदारी है। पुत्र का सुख और बच्चों के संस्कार कुंडली के इसी घर से पता लगाए जा सकते हैं। आपकी बुद्धि के स्तर का पता लगाने के लिए और आपके सामान्य ज्ञान के लिए कुंडली का पांचवा घर जिम्मेदार है।


आपकी आध्यात्मिक शक्ति और जादू टोने आदि का विचार कुंडली के पांचवें घर से करना चाहिए। जिस प्रकार लॉटरी लगना कुंडली के पांचवें घर से देखते हैं उसी प्रकार अचानक बड़ी रकम का नुकसान होना भी पांचवे घर से देखा जाता है।


गुरु का विचार भी पांचवें घर से किया जाता है। इसी तरह शिष्य का विचार भी पांचवे घर से करना चाहिए।


शेयर मार्केट
में पड़े आपके शेयर की संपत्ति कुंडली के पांचवें घर से पता चलती है। इसी तरह जुए में जीतना या हारना, जुए की आद, मॉडलिंग से प्राप्त धन, ब्लैक मेलिंग का पैसा यह सब कुंडली के पांचवें घर से देखा जाता है। इसके अतिरिक्त पिता की आयु का विचार भी कुंडली के पांचवें घर से करना चाहिए। आप की पैतृक संपत्ति का वह हिस्सा जो आपको नहीं मिला या फिर झगड़े की जमीन इसका कारक भी कुंडली का पांचवा घर है। इसके अतिरिक्त अदालत के द्वारा मिलने वाली टेलीमनी जो पति या पत्नी से मिलती है उसके लिए भी कुंडली का पांचवा घर जिम्मेदार होता है।

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आइए अब विचार करते हैं कुंडली के नौ ग्रहों का पांचवें घर में फल क्या होता है।

यदि सूर्य कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो

तो जातक अपने पुत्र के यश के कारण मशहूर होता है। यानी उसका पुत्र अपने पिता का अपने कुल का नाम रोशन करेगा।

यदि चंद्रमा कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो

तो जातक के माता के कुल से किसी प्राणी का जन्म जातक के पुत्र या पुत्री के रूप में होता है।

यदि मंगल कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो

तो जातक के प्रेम संबंध समान गोत्र में यह रिश्तेदारी में से किसी के साथ होने की संभावना है। पुत्र के जन्म के पश्चात जातक का जीवन एक नया मोड़ लेता है यह अच्छा या बुरा कुछ भी हो सकता है।

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यदि बुद्ध कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो

तो समझ लेना चाहिए कि आपके ऊपर संतान कारण है इस जन्म में संतान की सेवा करनी पड़ेगी और संतान से सुख की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

यदि गुरु कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो

तो उत्तम संतान की प्राप्ति निश्चित है इसके अतिरिक्त संतान चाहे वह लड़का हो या लड़की हो आपका नाम रोशन करेगी और संतान होने के पश्चात जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं रहेगी। बहुत लोगों के जुड़वा संतान कुंडली के पांचवें घर में बृहस्पति के कारण होती है।

यदि शुक्र कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो


तो संतान के रूप में सौभाग्य जन्म लेता है लक्ष्मी की प्राप्ति होती है और यह लक्ष्मी अखंड होती है। इसके पश्चात पुत्र संतान भी उत्पन्न होती है जातक को जीवन में यश विद्या प्रेम विवाह तथा असीम सुखों की प्राप्ति होती है। कुंडली के पांचवें घर में शुक्र के होने से जातक को अनेक बार जीवनदान मिलता है अर्थात मृत्यु छू कर चली जाती है।

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यदि शनि कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो

तो जातक को लंबे इंतजार के पश्चात संतान की प्राप्ति होती है शेयर मार्केट के बजाय जातक को प्रॉपर्टी पर पैसा लगाना चाहिए।
जातक की शिक्षा अधूरी रह जाती है और प्रेम संबंध भी ऐसे व्यक्ति से कायम होते हैं जिसके साथ उम्र का काफी अंतर हो अनेक बार प्रेम संबंध बनते बिगड़ते हैं।

यदि राहु कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो

तो जातक की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है प्रेम संबंधों से कभी लाभ नहीं होता तथा जातक की पहली संतान दीर्घ जीवी नहीं होती। गर्भपात कई बार होता है परंतु ऐसे जातक की जुए सट्टे या शेयर मार्केट आदि में किस्मत अच्छी होती है लॉटरी लगने का भी योग होता है।

यदि केतु कुंडली के पांचवें घर में विराजमान हो

तो संतान और प्रेम संबंधों के विषय में केतु की पांचवें घर में स्थिति से राहु जैसे ही फल प्राप्त होते हैं परंतु पढ़ाई लिखाई में जातक उत्तम शिक्षा प्राप्त करता है तथा गुरुद्वारा प्राप्त मंत्र के बल पर जातक जीवन में तरक्की प्राप्त करता है अध्यात्म में गहरी रूचि होती है।


पांचवें घर में नौ ग्रहों के फल को हमने यथा स्थान रख दिया है यह सब ज्ञान हमारे अनुभव पर आधारित है जिससे आप सहमत या असहमत हो सकते हैं फिर भी यह लेख कैसा लगा इसके विषय में अपनी राय अवश्य दें।

धन्यवाद

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