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कुंडली का पहला घर आपके व्यक्तित्व रंग रूप और शारीरिक बनावट के बारे मे बताता है यह तो आपको पता ही था परंतु कुंडली के पहले घर के बारे मे कुछ ऐसा भी है जो आपने न कहीं पढ़ा न सुना।

कुंडली के पहले घर की रोचक और गुप्त बातें

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कुंडली का पहला घर आपके पिछले जन्म से संबंधित है क्योंकि आपको जो भी रूप रंग ग्रह गोचर मिले हैं वह आपके प्रारब्ध के कारण हैं और आपका जो अपना स्थान है । कुंडली में वह है पहला घर इससे आपकी पर्सनैलिटी आपका स्वभाव तो पता चलता ही है बल्कि पिछले जन्म में आपके ऊपर क्या ऋण बाकी रह गए हैं वह सब कुंडली के इसी घर से पता चलेंगे ।

ऐसे अनेक रहस्य हैं जो लग्न स्थान से उजागर किए जा सकते हैं सूर्य आदि ग्रहों के अनुसार पहले घर के बेसन गुप्त रहस्य इस प्रकार

पहले घर में सूर्य

सूर्य यदि लग्न में हो या लगने से संबंध रखता हो तो ऐसे जातक को दूसरों का प्रेरणा स्त्रोत समझा जा सकता है । एक राजा की तरह अपने कर्तव्यों का निर्वाह जातक करता है। पूरी जिंदगी व्यस्तता में गुजर जाती है क्योंकि पिछले जन्म से ऊंचे कुल में उत्पन्न होकर जातक ने शुभ कर्म किए थे उसी के फलस्वरूप इस जन्म में जातक को राज्य कृपा प्राप्त होती है ।

पहले घर में चंद्रमा

चंद्रमा पहले घर में विराजमान हो तो जातक को स्त्री ऋण के लिए आया समझे। पूर्व जन्म में किए गए किसी शुभ कार्य की वजह से इस जन्म में लक्ष्मी प्राप्ति होती है इसलिए लग्न में चंद्रमा हो तो जातक इस जन्म में हर तरह से सुख भोगता है। पूर्व जन्म में किसी स्त्री द्वारा ली गई मदद का ऋण चुकाने के लिए इस जन्म में जातक का पदार्पण हुआ है ।

पहले घर में मंगल

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लग्न मैं बैठा मंगल इस बात का इशारा है कि इस जन्म में जातक को मानसिक शारीरिक और सामाजिक कार्यों के लिए विशेष उद्यम करना पड़ेगा तथा जातक का पूरा जन्म कार्य करता रहेगा । यहां तक की मृत्यु के क्षणों में भी जातक अपने कार्यस्थल पर होगा और अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहा होगा।

पहले घर में बृहस्पति

लग्न में बृहस्पति की स्थिति हो तो जातक को पूर्व जन्म में गुरु की सेवा करने का अवसर मिला होगा । इसके परिणाम स्वरूप इस जन्म में विद्या लाभ भाग्य उन्नति और आध्यात्मिक विकास होना निश्चित है। जातक अपने कुल में सर्वाधिक श्रेष्ठ गणमान्य और पूजनीय माना जाएगा । जातक का शरीर विशाल और चरित्र विस्तृत होगा। धर्म के सूक्ष्म ज्ञान के अतिरिक्त जातक को आत्मज्ञान की प्राप्ति भी संभव है।

पहले घर में बुध

बुध लग्न में हो तो पिछले जन्म में जातक यादव अध्यापक था या फिर व्यापारियों में श्रेष्ठ कोई गणमान्य व्यक्ति रहा होगा। जातक को पिछले जन्म के पुण्य के फलस्वरूप यह जन्म मिला है और इस जन्म में जातक अपने चातुर्य तथा विस्तृत सामाजिक संपर्क के लिए जाना जाएगा। इस जन्म में जातक एक सफल व्यापारी या फिर एक सफल वक्ता के रूप में प्रसिद्ध होगा । जातक की कीर्ति देश विदेश में होगी तथा जातक को अनेक पुरस्कार रत्न आभूषण आदि की प्राप्ति भी होगी।

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पहले घर में शुक्र

शुक्र यदि लग्न में हो तो जातक पिछले जन्म में अपनी पत्नी के पुण्य कर्मों के प्रताप से इस जन्म को भोगता है इसलिए इस जन्म में जातक को ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी भोग विलास में समय बीतेगा तथा जातक स्वयं भी मनोरंजन के क्षेत्र से जुड़ा रहेगा । संगीत कला नृत्य अभिनय आदि में जातक विशेष रूप से रुचि लेगा तथा जातक के विचार नवीन तथा प्रेरणादायक होंगे अपनी क्रिएटिविटी के बल पर जातक देश-विदेश में प्रसिद्ध होगा।

पहले घर में शनि

शनि यदि लग्न में हो तो पूर्व जन्म में जातक ने अवश्य ही माता पिता से सेवा करवाई होगी। माता पिता की सेवा करना मनुष्य का धर्म है परंतु जब जातक को माता पिता की सेवा का अवसर नहीं मिलता है तो मात्री पितृ ऋण अगले जन्म में भोगने पड़ते हैं। जातक अपने अभिमान के कारण बदनाम होगा और जातक के शत्रु उसके परिवार के शत्रु बन जाएंगे। इस जन्म में जातक को अपने कार्य से कभी संतुष्टि नहीं मिलेगी इसके अतिरिक्त मानसिक विकारों से या किन्ही शारीरिक कष्टों से जातक को ग्रसित रहना पड़ेगा। बचपन से ही जातक पर जिम्मेदारियों का बोझ प्रस्तुत हो जाएगा। महान दुखों को भोग कर जातक इस संसार में अपने पूर्व जन्म के ऋण को चुकाता है।

पहले घर में राहु

लग्न में उपस्थित राहु जातक के लिए किसी श्राप से कम नहीं है अपने पिछले जन्म में जातक ने अवश्य ही घोर पाप किए थे इसी के फलस्वरूप जातक को यह जन्म मिला है। जातक इस जन्म में उन सभी को धोखा देता है जिनसे कभी मदद ली हो। ऐसे जातक का विश्वास नहीं किया जा सकता और इसका प्रमाण जातक बार-बार देता है। इस जन्म में जातक पाप कर्मों में लिप्त रहता है और जातक का जीवन एक रहस्य बन जाता है। कानून को तोड़ मरोड़ कर उसकी कमियों का फायदा उठाना जातक का असली काम होता है। जातक को ऐसे कार्यों में ड्यूटी होती है जिसमें अनुचित ढंग से पैसा कमाया जा सके। जातक ने पूर्व जन्म में जो भी कर्म किए थे उन्हीं पाप कर्मों को जातक इस जन्म में फिर दोहराता है। जातक पर कलयुग की कृपा रहती है धर्म कर्म और पूजा-पाठ आदि से जातक दूर रहता है।

पहले घर में केतु

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केतु लग्न में हो तो जातक पूर्व जन्मों के ज्ञान तपोबल आदि को इस जन्म में भी प्रकट करता है दैवीय कृपा दृष्टि उस पर बनी रहती है तथा जातक एक रहस्य में जीवन को जीता है। इस जन्म में जातक पर पिछले जन्म के स्तरीय ऋण का बोझ रहता है जिसके फलस्वरूप दांपत्य जीवन में जातक को सुख नहीं मिलता । ऐसे जातक को आध्यात्मिक उन्नति के लिए कार्य करना चाहिए उसी के लिए जातक का जन्म हुआ है ।

लग्न में नौ ग्रहों की उपस्थिति का जो परिणाम होता है वह हमने आपको बताया। यह आवश्यक नहीं कि लग्न में एक ही ग्रह विद्यमान हो । एक से अधिक ग्रह यदि लग्न में विराजमान हो तो उनका अलग फल होता है जिसे समझाने के लिए पर्याप्त समय और स्थान की आवश्यकता रहेगी ।फिलहाल पाठकों को इसी पर संतोष करना चाहिए।

देव की प्रेरणा से जो ज्ञान आप को दिया गया है उसमें कुछ भी संदेह नहीं है पाठक गण इससे सहमत या असहमत हो सकते हैं ।

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धन्यवाद


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