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त्यौहार हमें हमारे धर्म और संस्कृति से जोड़ते  हैं। हमें हमारी प्रथायों के बारें में बताते हैं। यह त्यौहार ही है, जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाए हुए हैं। भारत में हर धर्म और सम्प्रदाय के लोग रहते हैं। वे सब अपने अपने त्योहारों को बड़े ही सद्भाव से मनाते है। यही वजह है कि भारत देश, विश्व का एक मात्र ऐसा देश है, जहाँ विविधता में एकता समाई हुई है। हम लोग अनेकता में भी एकता को दर्शाते हैं। 

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भारत में आने वाले त्योहारों में हिन्दुओं के त्यौहार सबसे ख़ास होते हैं।  हर त्यौहार अपने में  एक खास ऊर्जा लिए आता है। इन त्योहारों की ऊर्जा व्यक्ति के अंदर रोमांच पैदा करती है। उसे धर्म के साथ जोड़ती है।वैसे हम सभी को पता है कि हिन्दुओं के त्यौहार हर माह आते हैं। आज हम यहाँ जनवरी महीने में आने वाले त्योहारों के बारे में बताने जा रहे हैं।

जनवरी के महीने में कौन से हिन्दू त्योहार आने वाले हैं?

जनवरी 2022 में आने वाले हिन्दू त्यौहार :

09 जनवरी 2022  रविवार भानु सप्तमी   

भानु सप्तमी का दिन सूर्य भगवान को समर्पित है। इन दिन को बहुत ही शुभ माना गया है। यदि किसी भी रविवार के दिन सप्तमी तिथि पड़ती है। उस दिन को भानु सप्तमी का संयोग माना जाता है।  इस दिन सूर्य देव का व्रत करना और उनकी पूजापाठ करना सबसे शुभ होता है। सूर्य देव की कृपा पाने और इनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए यह दिन बहुत ख़ास होता है।  इस दिन सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल और  लाल चंदन, लाल फूल, चावल और थोड़ा गेहूं डालकर अर्घ्य देने और पूजा करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है।

13 जनवरी 2022 पौष पुत्रदा एकादशी और लोहड़ी

संतान प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान विष्णु का यह व्रत करने और उनकी पूजा करने से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। इस बार यह एकादशी 13 जनवरी 2022 को हैं। जो लोग इन दिन व्रत रखते हैं, उनको अपना व्रत 14 जनवरी 2022 को  07:10 सुबह से 09:23 सुबह के मध्य तोडना चाहिए।

उत्तर भारत खासकर पंजाब की तरफ मनाया जाने वाला मुख्य त्योहार है लोहड़ी। लोहड़ी को मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है। लोहड़ी  के दिन लोग आपस में मिलकर किसी खाली जगह में आग जलाते हैं। उसकी पूजा करते हैं। आग के अंदर तिल, रेवड़ी मावा और मूंगफली जैसी चीजों को आग में परिक्रमा लगाकर डालते है। उसके बाद लोग रेवड़ी, मूंगफली, लावा आदि चीजों को मिलबाट कर खाते भी है।

14 जनवरी 2022  मकर संक्रान्ति और पोंगल

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मकर संक्रांति का त्यौहार हमारे धर्म ग्रन्थों में सूर्य और शनि देव से जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐसा माना जाता है जब सूर्य देव अपने बेटे शनि के घर यानी की मकर राशि में आते हैं तब संक्रांति का मनाई जाती है। वैसे तो साल में 12 संक्रांति होती है। पर सूर्य का मकर राशि में जाना सबसे बड़ी संक्रांति के रूप में जाना जाता है।  इस दिन पवित्र नदी में नहाना, दान करना और तिल और खिचड़ी को खाना शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन व्यक्ति  को सूर्य और शनि से जुड़ी हुई चीजों का दान करना चाहिए। यदि आपकी कुंडली यह दोनों ग्रह समस्या पैदा कर रहे हैं, तो आपको इन दोनों से जुड़ी चीजे अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए। ऐसा करने से यह ग्रह अपने अशुभ प्रभाव नहीं देते हैं।

मकर संक्रांति के दिन सूर्य के उत्तरायण में आता है. इस दिन देवता अपनी नींद से जागते हैं. शुभ कामों के शुरुआत होती है.  इस त्यौहार के बाद से ठंड कम होने लगती है. दिन भी बड़े और राते छोटी होने लगती है.  इस दिन से ही बसंत की शुरुआत होने लगती है। किसान अपने खेतों में फसल काटने की तैयारी करने की शुरुआत करने लगते हैं। गुरु शंकराचार्य के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा जी, गंगा सागर, कुंभ और प्रयागराज जैसी नदियों में नहाना चाहिए।

मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति 14 जनवरी 2022 को मनाई जाएगी।

मकर संक्रांति का शुभ समय  2:43 पी एम से 06:18 पी एम तक है।

मकर संक्रान्ति महा पुण्य काल 02:43 पी एम से 04:34 पी एम तक ही है।

पोंगल का त्यौहार तमिलनाडू तरफ हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे ख़ास त्यौहार है।  यह त्यौहार हर सालसंक्रांति के समय ही मनाया जाता है।  इस त्यौहार का इतिहास कम से कम 1000 साल पुराना है। यह त्यौहार इस राज्य में चार दिन तक चलता है। इस दिन लोग किसी खुली जगह में मीठे चावल बनाते हैं। मिल बांट कर खाते हैं। एक दुसरे को शुभकामनाएं देते हैं।

कुछ अन्य त्यौहार : 

इसके अलावा कुछ ऐसे त्यौहार है जो हर माह आते हैं। जैसे-  प्रदोष व्रत 15 जनवरी को है।  इस  दिन भगवान शिव की पूजा और उनकी कृपा पाने के लिए व्रत किया जाता है। दूसरा शाकम्भरी पूर्णिमा यह 17 जनवरी को है।   इसे शाकम्भरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है।  अधिकतर नवरात्री प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी को समाप्त होती है, लेकिन शाकम्भरी नवरात्री ही सिर्फ एक ऐसी नवरात्री है जो अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा पर समाप्त होती है।  तीसरा 21 जनवरी को संकटा चतुर्दशी। इस दिन भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए पूजा पाठ और व्रत किया जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से सारे कष्ट दूर होते हैं।

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