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कुछ लोग अपने जीवन की आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर होते हैं। कुछ नहीं ऐसे बहुत से लोग होते हैं परंतु इससे भी ज्यादा लोग होते हैं वह जो सुबह दुकान पर आते ही भगवान से मांगते हैं कि भगवान आज बिक्री ज्यादा दे देना। जरा सी मुसीबत आती है तो फिर भगवान बचा ले। जरा सी बीमारी आ गई तो हे भगवान कुछ सीरियस ना हो।
तो ऐसे लोगों का जीवन चल रहा है।

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मन्नतें मांगना

जरा जरा सी बात पर मन्नत मांगते हैं। मंदिर से होकर आएंगे तो एक मन्नत , यदि गुरुद्वारा गए तो वहां से ऐसे मन्नत मांगते हैं जैसे यहां तो एक मन्नत फ्री की है।
तो कोई मौका नहीं छोड़ते मन्नत मांगने का।
चलो यह सब तो ठीक है बल्कि आप किसी न किसी माध्यम से भगवान को याद तो कर रहे हैं। परंतु … कुछ लोग ऐसे होते हैं जो समर्थ होते हुए भी…. अंग हाथ पैर सलामत होते हुए भी किसी और पर निर्भर हैं जैसे एक पति पत्नी की कमाई पर निर्भर है। यदि ऐसा है तो ईश्वर की दी हुई इस जिंदगी का यह अपमान है। यदि आप एक ऐसे भाई हैं जो अपनी बहन के धन पर निर्भर है तो यकीन मानिए यह किसी श्राप से कम नहीं। यदि आप ऐसे पिता है जो अपनी पुत्री के धन का उपयोग कर रहे हैं तो याद रखें यह ऋण आपको चुकाने के लिए एक जन्म कम पड़ जाएगा।

मोहताज की ज़िंदगी

यदि आप एक ऐसे भाई हैं जो अपने से छोटों के धन का उपयोग कर रहे हैं तो इस भोग के लिए भ्रातृ ऋण उपस्थित होता है जोकि मंगल को खराब कर देता है अब देखिए इन सब चीजों से ग्रहों का कैसे संबंध है।
ईश्वर ने कुछ ऐसी व्यवस्थाएं की हैं जो किसी अज्ञानी को भी मालूम हैं। जैसे बड़े भाई होकर छोटे भाई बहनों के प्रति उनका पालन और जरूरत पड़ने पर छोटों की मदद। पति होकर पत्नी का पालन बच्चों का पालन ताकि स्त्री ऋण मातृ पितृ ऋण उपस्थित न हों।

भाई का कारक है मंगल यदि आप ऐसा नहीं करते हैं इसका उल्टा करते हैं तो आप अपने मंगल को बर्बाद कर देते हैं जो की कितना भी अच्छा क्यों न हो आपकी कुंडली में?

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यदि आप पिता होकर पुत्री के धन का उपयोग कर रहे हैं तो शुक्र और चंद्रमा इन दो ग्रहों को बर्बाद कर रहे हैं आप अपने जन्म के समय कितने ही शुभ चंद्रमा और शुक्र को लेकर पैदा हुए हो परंतु यह कर्म करने से आपके ये दो ग्रह केवल बर्बाद होंगे।

एक समर्थ पति को अपनी पत्नी की ना केवल रक्षा करनी चाहिए बल्कि उसके लिए धन उपार्जन की व्यवस्था भी करनी चाहिए परंतु किसी कारणवश यदि आपको पत्नी से कुछ लेना पड़े तो उसे अपनी संतान पर ही खर्च करें अन्यथा शुक्र आपकी कुंडली में कितना भी अच्छा हो वह बर्बाद हो जाएगा

यदि आपको अपनी बहन से धन की मांग करनी पड़े तो उसे भी एक अच्छी स्थिति नहीं कहेंगे क्योंकि ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है जब आपका बुध पूरी तरह से खराब हो। ऐसा करके आप अपने बुध और केतु को बर्बाद कर देते हैं। अपनी मरर्जी से हर बहन अपने भाई की सहायता करती है वो अलग बात है।
यदि आपने किसी निसंतान व्यक्ति से मदद ली है तो यह भी एक ऐसा ऋण उपस्थित हो जाता है जो आपकी संतान के लिए हानिकारक है इसलिए निसंतान कि हमेशा मदद करें उस से फ्री में कभी कुछ ना ले।

आइए अब समझते हैं राजयोग और दरिद्र योग को

लोग दरिद्र योग की परिभाषा पूछते हैं शकट योग भिक्षुक योग की बात करते हैं फिर राजयोग की बात करते हैं क्या है। क्या है राज योग और क्या है दरिद्र योग……..?

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राजयोग वह है जब आप सम्मान की रोटी खाते हैं। आपके पास किसी की देनदारी नहीं है बल्कि आपको लोगों से पैसा लेना है। आपने उधार तो दिया है परंतु किसी से उधार नहीं लिया है। इसे कहते हैं राजयोग इसके विपरीत वह राजयोग नहीं है जिसकी लोग कल्पना करते हैं क्योंकि राजशाही राजा प्रजा व्यवस्था अब लोकतंत्र के पास है। जनता ही राजा को चुनती है। तो जो आत्मसम्मान की रोटी खाता है वही राजयोग कहलाता है।

दरिद्र योग और शकट योग

भाई होकर यदि बहन से पैसा लिया है और वापस नहीं किया या वापस करने की शक्ति ही नहीं है। पिता होकर पुत्री से पैसा लिया वापिस नहीं किया। ससुर होकर जमाई से पैसा लिया और वापस नहीं किया। मामा होकर भांजे से पैसा लिया और बहन बुआ बेटी इनसे धन या आर्थिक मदद लेना यही है शकट योग दरिद्र योग अपने आत्म सम्मान को गिरवी रखकर धन प्राप्त करना यही है भीषण दरिद्र योग

इस लेख से किसी को चोट पहुंची हो तो उसके लिए विनम्रता के साथ क्षमा प्रार्थी हूं परंतु भगवान से मांगना कहीं भी गलत नहीं लिखा है बिना मांगे मदद कर देना यह सब का कर्तव्य है। आपकी ग्रह स्थिति अच्छी होगी तो आप समर्थ होंगे और कुंडली खराब है तो दूसरों पर निर्भर।

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क्या आप देवी देवताओं की शक्ति पर निर्भर हैं ?

कुंडली में बंधन और मोक्ष का योग


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