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देवी का प्रतीक सामने हो ज्योत लगी हुई हो आसन बिछा हो। कुछ फल या मेवे, बादाम, काजू, किशमिश या फिर दो पान थाली मे सजाकर देवी को अर्पित करें। भोग या प्रसाद, पेड़े या हलवा जो कुछ भी आपने प्रेम से बनाया है उसे भी देवी को समर्पित करके माथे के बीच मे ध्यान लगाकर बैठ जाएँ। कुछ पल के लिए अपने दुखड़े भूल जाएँ।

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मन मे जो विचार हैं उन्हें त्यागकर एक ध्यान आते के बीचों बीच हो। जैसे ही आपको लगे कि अब मन शांत है मन ही मन मे देवी से बड़ी विनम्रता से अपनी भाषा मे कहें कि देवी आपका स्वागत है। एक एक चीज का ध्यान करें और देवी को प्रार्थना करें कि इसे स्वीकार करें देवी। जैसे देवी आपके सामने खड़ी है साक्षात। बोलें कि हे देवी ये फल स्वीकार करो यह मेवे, मिठाई, पान ग्रहण करें देवी।

इस बार कुछ न मांग कर देखें

देवी को अपने मन से देखने का प्रयास करें। कल्पना करें कि देवी ने प्रसाद ग्रहण कर लिया है। अवसर देखकर देवी से मन ही मन कहें कि हे देवी इन नवरात्रों मे यहीं निवास करो। यह मेरी इच्छा है। इतनी सी प्रार्थना से भी प्रसन्न होकर देवी वर दे जाती है। जरूरी बात यह है कि देवी से कुछ मांगा न जाये। यहाँ तक कि 9 दिनों की पूजा के उपरांत भी कोई मांग न करें। हालांकि देवी को अपने घर मे निवास करने के लिए कहना भी एक तरह से कुछ मांगने जैसे है।

एक बार देवी का वास आपके घर मे हो जाये तो मेरा यह विश्वास है आपको अपनी कल्पना से भी परे का आनंद मिल जाएगा। वास्तव मे कुछ न मांगा जाये तो देवी पूछने के लिए विवश हो जाएंगी या फिर बिना पूछे आपके मन के किसी कोने से आपकी कोई दबी ख़्वाहिश को जान लेंगी। इसे भी आप छुपा लें तो ये परम भक्ति हुई। ऐसे भक्त के वश मे भगवान रहते हैं।

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चलते फिरते उठते बैठते जागते सोते इन नवरात्रों मे देवी के नाम को ही स्मरण करें।

ॐ एं ह्री क्ली चामुंडाए विच्चे

इस मंत्र को जपा जा सकता है।

पूरी विनम्रता के साथ इन 9 दिनों मे शुद्ध चित्त से देवी की भक्ति करें और बदले मे देवी से सपने मे भी कोई मांग न करें। ऐसे भाव से मैं स्वयं पूजा किया करता हूँ।

जय श्री राधे।


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